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Bhojan Me Barkat Saakhi Huzur Baba Dalip Singh Ji

मेरी बहन मधुबाला की शादी लखनऊ में रहने वाले एक लड़के से तय हुई। हम दोनों परिवारों में आप मे  सलाह – मशिवरा करके यह निर्णय लिया कि शादी लखनऊ में ही होगी। इसलिए हम परिवार सहित लखनऊ पहुंच गए।  लड़के वालो  से पूछने पर उन्होंने बताया कि वह लगभग 300 आदमियों की बारात लाएंगे। हमारी तरफ से लगभग 100 व्यक्ति थे ,इसलिए हमने 400 व्यक्तियों के खाने का प्रबंध करवा लिया। लेकिन बाराती 300 की जगह 500 आ गए। खाने के तीन सेट लगवाए थे। जब करीब 400 बाराती खाना खा चुके थे तो हमारे दो रिश्तेदार भागे भागे आए और बोले कि खाना तो खत्म होने वाला है।  यह सुनकर मुझे ऐसा लगा कि मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है। जब मैंने यह बात अपने फूफा जी को बताई तो उन्होंने एक आदमी को बुलाकर जल्दी 10 किलो आटा और आलू गोभी ले आने के लिए पैसे दिए।  मैंने अंदर जाकर देखा कि सब्जी के पतीले खाली पड़े हैं। मैंने मन ही मन अपने दयालु पिता से अरदास की है सच्चे बादशाह ! अपने बच्चे की लाज रखना।

हलवाइयों के  टेंट के अंदर तीन चार आदमी बैठे थे। तभी उनमें से एक बुजुर्ग ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है खाना के दो सेट हटा दो। उनका सामान वापस  पतीले में डलवा दो।  एक सेट पर खाना चलता रहे। मैंने उन्हें वैसे ही करने के लिए कह दिया। उस समय परम पूज्य हजूर जी की ऐसी कृपा हुई कि सभी बाराती और रिश्तेदारों के खाना  खा लेने के बाद भी खाना बच गया। जो 10 किलो आटा और आलू गोभी मंगवाए थे वह वैसे ही पड़े रहे ,उन्हें बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। इस प्रकार हुज़ूर जी ने  अपने बच्चे की  लाज रख ली। इतने अच्छे ढंग से खाना का काम पूरा होने पर मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो हुज़ूर जी ही  उस बुजुर्ग  व्यक्ति के रूप में हमारी समस्या को सुलझा  गए हैं।

जय सिया रामजी।

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