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Saakhi- Bulaawa Aa Gaya

यह साखी  सन 1959 की है, जब मेरे पति बहुत बीमार थे।  उनकी हालत इतनी खराब थी कि बचने की उम्मीद नहीं थी।  ऐसी स्थिति में मैं उदास मन से रोती रहती थी।  एक  दिन बहुत मायूस होकर मैंने परम पूज्य हुज़ूर जी को  अरदास की कि कृपा करके मेरे पति को बचा लीजिये ।  मेरी विनती सुनकर हुज़ूर जी मेहरबान हो गये और  उसी समय से  मेरे पति की हालत में सुधार होना शुरू हो गया और थोड़े ही दिनों में वे काफी स्वस्थ हो गए। 
 पति के  ठीक होने पर मैंने उन्हें अपने साथ लेकर जी हुज़ूर जी के दरबार में हाजिर हुई। हुज़ूर जी को मत्था      टेकने के बाद जब हमने पूज्य   माता जी को  मत्था टेका तो वे मेरे पति को  साथ देख कर बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया।  मैंने उस रात  की पूरी बात पूज्य माता जी को विस्तार से सुनाई जब मेरे पति की तबीयत ठीक होने लगी  थी।  सुनकर माताजी ने फरमाया ” आपके पिताजी उसी रात को 2:00 बजे मुझे कह रहे थे कि दर्शन लाल का बुलावा आ गया है।  मैंने विनती की कि इस समय उसके घर में कोई कमाने  वाला नहीं है,  आप कृपा करें।  तब आपके पिताजी ने फरमाया कि अच्छा तो उसे रख लेते हैं।  इस प्रकार उन्होंने तुम्हारे पति पर कृपा की। ”  यह सुनकर मैंने हुज़ूर जी के पास जाकर उनका धन्यवाद किया। 
जय सिया रामजी।

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