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Saakhi Huzur Baba Dalip Singh Ji| Sookha|Pushpa Sharma Ji|Allahabad

सन 1958 में परम पूज्य हजूर जी इलाहाबाद के  नवादा कॉलोनी में ठहरे हुए थे।  मैं और मेरी गुरु बहन श्रीमती ग्रोवर ने हुजूर जी के दर्शन करने के लिए आने – जाने का रिक्शा किया। मेरे साथ मेरी 1 साल की बेटी भी थी जिसे सूखा रोग था।  हमने उसका काफी इलाज करवाया परंतु आराम नहीं मिला। 

जब हम हुजूर जी के पास पहुंचे और मत्था टेका तो हुजूर जी ने खुश होकर कहा , ”  आओ बच्चों आओ कहां से आई हो। ” मैंने कहा जी हम मीनापुर से आई हैं, उन्होंने फिर पूछा ” रिक्शे के पैसे किसने दिए? ” मैंने बताया कि हमने आधे – आधे दिए हैं।  यह सुनकर बहुत खुश हुए और फरमाया”  वाह!  बहुत अच्छा किया जब भी गुरु के दर्शन करने जाओ तो अपने पैसे से जाओ ,किसी पर बोझ ना बनो। ” कुछ देर बाद हुजूर जी ने मेरी बेटी की तरफ देख कर कहा, ”  कुड़िए तेरी लड़की तो बहुत कमजोर है।  फिर कुछ देर बाद  फरमाया ” जाने दो बड़ी होने पर इसकी शादी में बहुत खर्चा करना पड़ेगा। ”  मैंने हाथ जोड़कर विनती की , हुज़ूर  जी बचाना तो आपने ही है और शादी भी आपने ही करवानी है। मेरी बात सुनकर हुज़ूर जी  खुश हो गए और फरमाया ” जा थोड़ी खंड  ले आओ।  उसी समय मुझे संगत में एक लड़की ने रसोई से खंड  लाकर दे दी।  हुज़ूर जी ने खंड  पुड़िया में बनाकर अपने तकिए के नीचे रख लिया। कुछ समय बाद  जी ने नीचे से निकालते हुए फरमाया ” बेटी, गाय के मूत्र में यह चुटकी मिलाकर सवा महीने तक इसे पिलाना।  इस रख की लाग  को खत्म मत होने देना। जब खत्म होने वाले हो तो इसमें और मिला देना।  अब सीधी घर चले जाओ।  उनकी आज्ञा अनुसार हम सब घर वापस आ गए। . 

मैंने अपनी बेटी को दवाई देनी शुरू कर दी।  हुज़ूर जी की कृपा से उसका सूखा रोग बिल्कुल ठीक हो गया। आज वह अपने पति तथा बच्चों के साथ सुखी है। 

जय सिया रामजी।

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