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Saakhi- Jameen ki registry Bhola Singh Ji

 सन 1964 में हमारे गुरु भाई प्रीतम  सिंह जी व सूरत सिंह परम पूज्य हजूर के दर्शन करने जबलपुर गए।  उन्होंने वापिस आकर हुज़ूर जी का मेरे लिए दिया हुआ आदेश बताया कि मैं और जमीन खरीद लूं।  मैंने पीलीभीत के पास 100  एकड़ जमीन का सौदा कर लिया।  इसके पहले मैंने  भदरसा  गांव में 26 एकड़ जमीन खरीदी हुई थी।  100 एकड़ जमीन का बयाना देकर रजिस्ट्री की तारीख तय कर दी गई। इस 100 एकड़ जमीन में मेरा चौथा हिस्सा था , बाकि तीन हिस्से मेरे गुरुभाई के थे। किसी कारणवश वे तीनो गुरुभाई समय पर पैसे इकठा न कर सके।   हमारा सौदा कैंसिल (रद्द)  हो गया और हमारा बयाना भी  जब्त  हो गया। इससे हम सब बहुत उदास हो गए। 
 दूसरे ओर पहले खरीदी गई 26 एकड़ जमीन वाला सौदा भी खटाई में पड़ गया।  हमें पता चला कि वह जमीन दो सगे भाइयों की थी।  एक पंजाब में रहता था और दूसरा पीलीभीत में।  पीलीभीत वाले भाई ने पटवारी से मिलकर पंजाब वाले भाई का नाम पटवारी की कागजो  में से कटवा दिया था।  जब पंजाब वाले भाई को इस बात का पता लगा तो उसने पीलीभीत वाले भाई पर 420 का मुकदमा दाखिल कर दिया। इससे मेरी  26 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री रद्द हो सकती थी। मुझे एक तरफ 100 एकड़ जमीन का सौदा कैंसिल होने का और अब 26 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कैंसिल होने की चिंता लग गई। पीलीभीत  जमीन का सौदा मेरी जिम्मेवारी पर  हुआ था। मैं बहुत दुखी हो गया और हुज़ूर जी के आगे अरदास की। 
तभी मैंने देखा कि हुज़ूर जी  मेरे सामने थोड़ी दूरी  पर खड़े हैं।   उनके दर्शन पाकर मुझे बहुत खुशी हुई। उस समय उन्होंने केवल एक परना  पहना हुआ था और उनके साथ में एक सेवक था।  ऐसा लग रहा था जैसे वे मालिश करवाते-करवाते आए हैं।  उन्होंने मुझे हाथ के इशारे से आशीर्वाद देते हुए धीरज दिया और देखते ही देखते अदृश्य हो गए।  हुजूर जी के साक्षात दर्शन पाकर मेरा मन हल्का हो गया।  हुजूर जी के इशारा करने से मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो अब मेरी दोनों मुश्किलें हल हो जाएंगी।  
कुछ ही दिनों में हुजूर जी की कृपा से पैसों  का इंतजाम कर  लेने पर हमारी 100 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री हो गई और दोनों भाइयों का आपस में समझौता हो जाने से 26 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कैंसिल होने से बच गई।  इस प्रकार हुज़ूर जी ने कृपा करके मेरी  डूबती  हुई  नैया को  किनारे  लगा दिया। 

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