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Saakhi- Sewa khushi se kare

यह बात देश के बंटवारे से पहले की है। हम उस समय मॉडल टाउन लाहौर में रहते थे।  मेरे पिताजी बहुत बीमार रहते थे, अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ही उन्होंने मेरे माता जी से कहा कि मैं तुम्हें और अपनी दोनों बेटियां (बिमला और प्रेमिला ) गुरु नानक जी के हवाले कर रहा हूं।  ऐसा कहते ही उनके प्राण निकल गए। 
 इस बात के 20 साल के बाद जब मेरी छोटी बहन पहली बार परम पूज्य जी के दर्शन करने जबलपुर गई तब  हुज़ूर जी ने उसे बताया ” तुम्हारे पिताजी तुमको गुरु नानक जी के हवाले करके गए थे।  गुरु नानक जी तो उस समय अपनी समाधि में लीन थे, इसलिए तब से मैं ही तुम्हारी रक्षा कर रहा हूं। तुम्हारे ताये, चाचे  आदि बहुत अमीर थे , पर तुम्हारे पिताजी ने तुम्हें उनके हवाले नहीं किया। ” फिर हुज़ूर  जी ने हमारी कोठी का नक्शा बताया। 
 घर आकर मेरी बहन प्रोमिला  ने मेरी माता जी को सारी बात बताई।  घर के नक्शे के बात  सुनकर माताजी एकदम बोल पड़ी ” हां,  हमारा घर बिलकुल  ऐसा ही था।” हुजूर जी ने यह भी बताया कि तुम्हारे पिताजी ने अपनी मां बाप की सेवा तो की पर खुश होकर नहीं बल्कि दुखी मन से। 
सब बातें सुनकर  मेरी माता जी   ने हमें   समझाया कि हमें माता – पिता की सेवा खुशी से करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देखो बेटा , तुम्हारे पिताजी का गुरु नानक जी पर अटूट विश्वास था इसलिए उन्होंने जाने से पहले हमें गुरु नानक जी के हवाले कर दिया था।  इसलिए हुज़ूर जी की  आज्ञा का पालन करते हुए सेवा सदा मन लगाकर खुशी से करनी चाहिए। 

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