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Saakhi Taza Doodh Surinder Kaur Kanpur

कानपुर में गुमटी इलाके में प्रत्येक रविवार शाम को परम पूज्य हज़ूर  जी का सत्संग होता है।  हज़ूर  जी के सेवक     बारी -बारी अपने घर में सत्संग करवाते है और सत्संग के बाद प्रसाद के साथ चाय नाश्ता भी करवाते हैं। यह बात 1995 की है। एक रविवार को हमारे घर सत्संग होना था। घर के सदस्यों ने मिलकर विचार किआ कि सत्संग के बाद सांगत को ताज़े दूध की चाय पिलाई  जाए।
शाम को निर्धारित समय पर सत्संग शुरू हो गया। प्रतिदिन की तरह बच्चे  दूध लेने  गए, काफी समय बीत गया पर वे  वापिस नहीं  आए। आरती का समय नज़दीक आ  रहा था, और हम सब चिंतित हो गए।  वैसे तो सुबह का काफी दूध पड़ा था परन्तु मेरा सांगत को ताज़े दूध पिलाने का मन कर रहा था।
हम बड़ी बेसब्री से दूध के आने का इंतज़ार कर रहे थे। इतने में एक अनजान आदमी सर् पे अंगोछा  बांधे ,धोती-कमीज़ पहने हुए दूध से भरा बड़ा डोल लेकर हमारे घर के सामने आया और पोछा ,” आपको दूध चाइये ?” हम तो ताज़े दूध के आने का इंतज़ार कर ही रहे थे। उसकी बात सुनकर हमारी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रही। हमने आवश्यकता अनुसार दूध  अपने बर्तन में डलवा लिया। दूध रखकर जब मै पैसे देने आई तो वो दूध वाला कही नज़र नहीं  आया। हमने उसे  बहुत ढूंढा पर वो कही नहीं  मिला।  हमे बहुत आश्चर्य हुआ  कि बिना पैसे लिए इतना सारा दूध देने  वाला यह कौन था , जिसने सही समय पर ताजा दूध देकर हमारी इच्छा पूरी कर दी। हम सबके मन में एक ही विचार आया कि ऐसी लीला तो हमारे हुज़ूर जी ही कर सकते हैं।
इतने मैं बच्चे दूध का खली डोल  लिए वापिस आ गए और बोले की आज दूध वाले की भैंस न जाने कहा चली गई ,इसलिए दूध  तो मिला नहीं , अब क्या होगा ? मैंने कहा ” घबराओ नहीं , दूध आ गया है। “सबके जाने के बाद मैंने सारी  बात बच्चो  को सुनाई कि हज़ूर जी किस प्रकार दूध वाले का रूप धारण कर के ताज़ा दूध दे गए। यह सुनकर वो हैरान हो गए तब हम ने मिलकर हज़ूर जी का लाख-लाख शुक्रिया अदा किया।
बोल साचे दरबार की जय

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