Facebook GroupJoin Group for new bhajans, qwallis and videos

Saakhi- Vinashkalay Viprit Buddhi

. साखी नं 29

“विनाशकाले विपरीत बुद्धि”

बदमाश रामलाल मुच्छड़ को उसके दुष्कर्मो की सजा देना।

मेरे हजूर जी 1963 में पंचमढ़ी में विराजमान थे। मैं महाराज जी की सेवा में था, भगत सावन सिंह जी, चुन्नीलाल जी सब परिवार वही रहते थे। एक दिन सुबह 10:00 बजे के लगभग श्री हजूर जी हमारे मकान में आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। एक बार वहीं पर पलंग पर लेटे हुए थे। उसी समय भगत जी को सामने देखकर आवाज दी, भगत जी इसको मार दो, मैंने नहीं रहने देना। मैं और भगत जी हैरान और खामोश रह गए, कि हजूर जी की लीला हजूर जी ही जाने। इतने में ही हजूर जी ने मुझे फरमाया कि कागज कलम लेकर आ, मैं अंदर जाकर लेकर आ गया। महाराज जी ने हुक्म दिया कि एक चिट्ठी जबलपुर लिखनी है, रामलाल मुच्छड़ के घर। जो मैं लिखवाता हूं लिखो। भगत जी की तरफ मुंह करके हजूर जी बोले — भगत जी सुनो। तीन-चार दिन पहले की बात है कि भोपाल से बेदी नगर एक बारात आई थी, जो रामलाल मुच्छड़ के रिश्तेदार खुशाबी लाल थे, जिनको मेरे मंदिर में ठहराया गया था और रामलाल मुच्छड़ ने घर से मांस पका कर चोरी छुपे अपने रिश्तेदारों को मंदिर में भिजवा दिया। उसकी ये भयंकर भूल थी कि बाबाजी पंचमढ़ी में है और देख नहीं सकते, उनको पता नहीं लग सकता पर उसकी ये भूल थी। वैसे भी भगत जी आप जानते हो कि वो नीच प्रकृति का शराबी कबाबी है। उसका इतना दुस्साहस इतनी गुस्ताखी। उसको उसके किए की सजा मिलनी ही चाहिए जो मैं दे रहा हूं। अब उसकी गुस्ताखियां बर्दाश्त से बाहर होने लगी है। इसलिए मैंने यमराज को हुक्म कर दिया है कि उस को खत्म कर दो।
इसलिए बार-बार कह रहा हूं यमराज को आदेश दे रहा हूं कि उसको मार दो। आपको पता है कि किसी की भी जिंदगी मौत मेरे हाथ में है। श्री हजूर जी चिट्ठी का विषय मुझे बता रहे हैं, जो उसकी घरवाली के नाम थी।
कि तेरा पति भोपाल से सुबह 7:00 बजे के लगभग गाड़ी से आएगा और मदन महल स्टेशन का सिग्नल नहीं होगा तो गाड़ी बेदी नगर के नजदीक रुक जाएगी। वो वहीं उतर कर पैदल अपने घर आएगा और दरवाजे पर आकर एक पत्थर पर बैठ जायेगा और तुम से पानी मांगेगा। तू पानी देकर अंदर जाएगी कि तभी पत्थर के नीचे से एक सांप निकल कर उसे डस लेगा और उसकी ऐसे मृत्यु हो जाएगी। उसके दुष्कर्मो की उसके गलत कर्मों की सजा यही है।
इतने पर परम पूज्य माता जी ऊपर आ गई और उन्होंने विनती की कि हजूर जी आप के हुक्म में मैं दखल तो नहीं देती पर विनती करती हूं कि लिखकर मत भेजिए। आगे आप ही मालिक है। भगत जी ने भी हाथ जोड़कर विनती की कि महाराज जी लिख कर मत भेजिए। श्री हजूर जीने परम पूज्य माता जी की बात मान ली और चिट्ठी लिखवाना बंद कर दिया। पर बार-बार भगत जी की तरफ मुंह करके महाराज जी कहने लगे महाराज जी बड़े जोश में आकर कहने लगे कि जब उसकी अर्थी उसके घर से निकलेगी और उसकी पत्नी दहाड़े मार-मार कर रोएगी तो लोग देखेंगे कि मेरे मंदिर की बेअदबी का क्या फल है। ये दुनिया में एक मिसाल कायम हो जाएगी। फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि मेरे मंदिर की बेअदबी करें। वैसे भी भगत जी आप जानते हैं कि सभी बेदी नगर वाले उसकी बदमाशियों से तंग परेशान थे। कुदरत भी उस पर नाराज है। जिसकी सजा मैं उसको दे रहा हूं। ऐसा दुष्ट प्रकृति का व्यक्ति बेदी नगर में नहीं रहना चाहिए। अन्ततः बात तो समाप्त हो गई। पर हुआ ऐसा ही जो हजूर जी ने फरमाया। वो अटल था। होना ही था। वो सांप इतना जहरीला था उसके जहर का इतना तेज असर था कि डॉक्टर के आने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई।
यहां एक बात और जब वो स्टेशन से घर आया था तो जूते उतारकर पत्थर पर पांव लटका कर बैठा था, उसका ध्यान दूसरी तरफ था। और तभी सांप ने उसे डस लिया वह चिल्लाया भी कि सांप सांप, उसकी पत्नी भागी आई पर वो बेबस खड़ी रह गई। उसने देखा सांप तो अपना काम करके झाड़ियों में जा चुका था। अब क्या हो सकता था होनी तो हो चुकी थी। कई बुजुर्ग कहावत कहते हैं कि पापी के मारने को पाप ही महा बली है। फिर बेदी नगर से उस मुछड़ का पक्का साथी जो बुरे कर्मों में सदैव उसके साथ रहता था उसे किसी तरह से पता लग गया कि इसकी मौत की सजा महाराज जी ने सुनाई है। और कुदरत की प्रेरणा से वो दुष्ट साथी बेदी नगर में कांपता कांपता पंचमढ़ी आ गया। बस से उतर कर जब वो महाराज जी के पास आया तो मैं पास ही बैठा था। तो महाराज जी ने कड़क कर कहा — आजा तू भी आ गया। अब तेरा भी नंबर लगाता हूं। महाराज जी की रोबीली और कड़कती आवाज सुनकर वह घबरा गया डर गया। उसके चेहरे का रंग उड़ गया। दूर से उसने अपना माथा जमीन पर लगाकर नाक रगड़ता हुआ कहने लगा मुझे माफ कर दीजिए मेरे बाल बच्चे भूखे मर जाएंगे। भगवान के वास्ते मुझे बख्श लो। गुनाह माफ कर दो। बार बार भगवान का वास्ता दे रहा था। महाराज जी ने उसकी तरफ मुंह करके आवाज दी कि तेरा दोस्त रामलाल मुच्छड़ नरको में पढ़ा तुझे याद कर रहा है, तैयार हो जा। मैं तुझे उसके पास भेज रहा हूं। तैयार हो जा। बेदी नगर जाकर कफन तैयार कर ले। कोई बदमाश आदमी मैंने बेदी नगर नहीं रहने देना। ये मेरा बसाया हुआ है।
और उधर वह रो-रो कर बेहाल हुआ जा रहा था। रो रहा था। और मेरी और भगत जी की तरफ देखता जा रहा था। तो भगत जी ने मन ही मन उसको बख्शने के लिए अरदास कर दी और उसको इशारा कर दिया, वो हजूर जी के चरणों पर गिर पड़ा। साथ ही भगत जी स्वयं भी अरदास करते रहे कि हजूर जी इसके बाल बच्चों का क्या कसूर वो यतीम हो जाएंगे। तो भगत जी की अरदास पर हजूर जी ने तुरंत हवा बदली जरा शांत हुए और वो पापी एक ही रट लगाए था, रहम, रहम, हजूर जी रहम करो, मेरे बाल बच्चे भिखारी हो जाएंगे। मुझे बख्श लो जीवन मृत्यु आपके हाथ में हैं। मेरा जुर्म ना देखिए अपना बड़प्पन देखें। तो हजूर जी ने कहा अच्छा तो सुन एक शर्त पर तुझे माफ करूंगा। तू बेदी नगर जाकर अपने मुंह से झाड़ू पकड़ कर पूरे मंदिर को साफ करेगा। सब संगत के सामने बेदी नगर वाले देखे तुझे। उसने फिर माफी मांगी और बेदीनगर जाकर उसने ऐसा ही किया। सारी दुनिया जानती है।

**********************
जय सिया राम जी
(साध संगत जी लिखने में कोई गलती हो तो माफी)

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *