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Saakhi|Vair Kare Nirvair Naa Hoye So Keeta Paaye, Sewa Ram Ji, Jabalpur

मेरे हुजूर जी जबलपुर में विराजमान थे। महाराज जी के फैजाबाद से आने से पहले महाराज जी के मकान में रसोई व एक कमरा सेवाराम को जो बहुत गरीब परिवार के थे रहने के लिए मुफ्त दिया हुआ था। वह छोटी-मोटी नौकरी करके अपना पेट पाल रहे थे। जब महाराज जी आए तो वह खाली करवा लिया। फिर वह बेदी नगर में ही एक छोटा सा मकान लेकर रहने लगे। शायद उनके मन में इस बात का दुख हुआ था कि महाराज जी ने कमरा खाली करवा लिया था। वह बाहर से तो मत्था टेकते पर अंदर से उनके मन में वह पहले वाली बात ना रही। श्रद्धा व विश्वास में फर्क आ गया। अब जिस समय कि मैं बात कर रहा हूं उन दिनों मैं भी बेदी नगर में मकान किराए पर लेकर रह रहा था। महाराज जी के पास संगत बहुत आती, खूब रौनक रहती। इधर मुंबई इंदौर के जो लोग फैजाबाद नहीं जा सकते थे अब सब जबलपुर आने लगे। आसपास की स्थानीय संगत भी बहुत आती। जहां अब बड़े दरबार का हाल कमरा है इसके बाहर की तरफ एक कमरा है जिसमें महाराज जी गेहूं का स्टाक रखते थे जो लंगर में काम आता था। साल भर की गेहूं खरीद कर अंदर रखते थे। एक बार ऐसा हुआ कि उसी सेवाराम ने चुपके चुपके महाराज जी की रिपोर्ट कर दी कि इनके घर में बहुत सारा अनाज जमा कर रखा है। उस समय राशन के कानून ही कुछ ऐसे थे कि एक परिवार इतने अनाज से ज्यादा नहीं रख सकता था लेकिन यह तो मंदिर था। संगत दिन रात आती लंगर चलता रहता दो तीन सौ आदमी लंगर खाते रहते। फिर हुजूर जी के जन्मदिन के लिए भी स्टॉक रखना पड़ता। अब वह समय आया कि दो पुलिस अफसर बिना इजाजत महाराज जी के घर आ गए। बाकी नौकरों को नीचे जीप में छोड़ आए। सबसे बड़ा अफसर तो ऊपर महाराज जी के कमरे में चला गया जहां महाराज जी विराजमान थे। कुदरती कुछ ऐसा समय हुआ कि नीचे कोई रोकने वाला बैठा ही नहीं था तो वह बिना इजाजत ही ऊपर गया। अभी जाकर सामने खड़ा ही हुआ था तो महाराज जी ने पूछा बेटा किधर आए हो। वह कुछ बोलता इससे पहले फिर महाराज जी बोले कि मेरे घर छापा मारने आए हो मेरी रिपोर्ट की है किसी ने, बोलो मेरे घर में तलाशी लेनी है। कौन सा कमरा दिखाऊँ तो उसने कहा मेरे पास आपकी रिपोर्ट आई है कि आपने अनाज बहुत ज्यादा स्टाक कर रखा है।महाराज जी बोले हां यहां दूर-दूर से यात्री आते हैं, उन्हें लंगर का खाना खिलाना पड़ता है। अब तुम जो चाहो करो पर एक बात सुन लो तुम तो कानूनी कार्रवाई बाद में करोगे पहले मेरा हुक्म सुनो। मैं गृहस्थी भी हूं और फकीर भी हूं, तुम जो बिना इजाजत मेरे कमरे में आए हो किसी गृहस्थी के घर में बिना इजाजत आना जुर्म है। अभी मेरा हुक्म सुनो अगर मैं चाहूं तो यहां बैठे-बैठे तुम्हें तुम्हारी नौकरी से निलंबित करवा दूं तुम्हारी यह पेटी (बेल्ट) उतरवा दूं, नमूना देखना है तो देखो। तुम इस काबिल ही ना रहो कि कोई कार्यवाही कर सको। कल का जो दिन चढ़ेगा तुम्हारे कार्यालय में पहुंचते ही ऊपर कमिश्नर के पास तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट पढ़ी होगी। और अगर मैं चाहूं तो तेरे बाल बच्चों पर तरस कर दूं तो तुम्हें बड़ा अफसर बना दूं यह दोनों बातें मेरे हाथ में है। ये सब मैं यहां बैठा बैठा ही कर सकता हूं। और जिसने मेरी रिपोर्ट की है उसका हाल भी तुम्हारे सामने आ जाएगा। मेरे अंदर 1 साल की गेहूं पड़ी है जो साल भर तक तक मेरे यहां बाहर से आने वाले यात्रियों के लंगर में काम आएगी। अभी यह बातें हो ही रही थी कि नीचे से और सेवक आ गए। उनके मन में बहुत गुस्सा आया कि ये अक्सर बिना इजाजत ऊपर क्यों आ गया। उन सब को देखकर उस सर्किल अफसर का मन एकदम बदल गया और करनी भगवान की उसके हाथ जुड़ गए और वह अदब में हो गया। और उसके मुंह से निकला हे महापुरुषों मैं गलती पर था। अब मैं सब जान गया हूं कि असली बात क्या है। अच्छा इजाजत दो। महाराज जी बोले नहीं बिना इजाजत गृहस्ती और साधु के मकान में आना जुर्म है इसकी सजा तो तुम्हें मिलेगी। तुम पुलिस की कार्रवाई करो मैं फकीरी कार्रवाई करूंगा। आज रात तक तुम्हारे घर में अनहोनी घटना हो जाए तो घबराना नहीं अगर डॉक्टरों के पास जाएगा तो मरीज नहीं बचेगा,मेरे पास आएगा तो बचा लूंगा। महाराज जी की आवाज कड़क थी, महाराज जी बहुत जोश में थे। बाकी सेवक हाथ जोड़कर खड़े थे। हुजूर जी के जलवे को वह सह ना सका फिर उसने जमीन पर झुककर नमस्कार किया। महाराज जी ने एक सेवादार को हुक्म दिया कि इसको चाय पिलाओ, पर उसने इजाजत मांगी। और बड़े अदब से बोला कि आप नाराज ना होना मैं किसी के बहकावे में आ गया था। मुझे अब पता चला कि आप कितनी शक्ति के मालिक हैं। मेरे बाल बच्चों पर खुशी की नजर रखना उनका कोई कसूर नहीं है, मैं अपने कसूर की माफी मांगता हूं। तो महाराज जी बोले अच्छा जा सकते हो तो वह चला गया। उधर क्या हुआ वह सेवाराम बीमार पड़ गया, बीमारी जोर पकड़ गई, किसी दवाई ने असर ना किया। उसकी औरत बार-बार माताजी के पास आती कि हमें बख्शवा दो, मेरे पति ने गलती की है। हमने आपकी कृपा को नहीं जाना, हम अकृतघ्न है। ऐसे करते 6 महीने गुजर गए मैं वहां पर ही था सारी सारी रात सेवाराम के चिल्लाने की आवाज आती उसको नींद नहीं आती। उधर उसके लड़के की शादी का समय आ गया जिसकी सगाई हो चुकी थी। इधर शादी की तैयारीयां उधर सेवाराम का रात भर चिल्लाना। उसके चिल्लाने की आवाजें सारे बेदी नगर में आती थी वह ऐसे चिल्लाता था जैसे कोई उसे मार रहा हो पर मारने वाला नजर नहीं आता था। 8 दिन शादी में रह गए थे तब उसकी पत्नी महाराज जी के सामने आकर खड़ी हो गई और विनती की कि हुजूर जी इस को बचा लो। इस पर हुजूर जी बोले मैंने इसकी टिकट काट दी है यह नहीं बच सकता यह नमक हराम आदमी है। मैंने इसके बच्चों को पाला यानी सांप को दूध पिलाया यह डसने से बाज नहीं आया। इसके किए की सजा इसको मिलनी चाहिए।अगर इसको सजा ना दूं तो और किसी की हिम्मत पड़ जाएगी। आखिर उसकी औरत ने कहा कि 8 दिन मोहलत दे दो मैं अपने बच्चे की शादी कर लूं। तो हुजूर जी बोले ठीक है 8 दिन तक वह नहीं मरेगा। उसके लड़के की शादी हुई और वह चल बसा। जो होना था वह हो गया ।

ऐ गुरु भाइयों इसीलिए ही हम रोज अरदास में पढ़ते हैं   “तेरे किते उपकरां नू भुलाइए कदी ना”   कोई दुनियादार भी हमारे समेत सतगुरु की मेहरबानीयों की कदर नहीं करता। कुछ हमारे कर्म कुछ साकत की संगत फकीरों के नजदीक रहकर भी मरकर नर्को में जाते हैं। इसलिए हर जीव को दोनों हाथ जोड़कर अपने सतगुरु के आगे हर घड़ी विनती करनी चाहिए की ऐ मेरे मालिक! हमारे कर्मों पर नहीं जाना हम पर रहमत करना नहीं तो दो जहां में बचाने वाला कोई नहीं है एक तेरे सिवाय, सब दुनिया अपने स्वार्थ की है। एक सतगुरु का ही दर है जिसके रहमत के दरवाजे कभी बंद नहीं होते। पर आदमी सतगुरु का निंदक तो ना बने अन्यथा उसको कोई माफ नहीं कर सकता।

जय सिया रामजी।

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